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जानिए एनर्जी एफिशिएंट पंप्स के बारे में

  • 13 October

पानी या किसी तरल द्रव को एक जगह से दूसरी जगह पर पहुंचाने के लिए आमतौर पर पम्प का इस्तेमाल किया जाता है। ऊर्जा के एक रूप से दूसरे रूप में बदलकर गति के माध्यम से उपकरण का प्रयोग कर, हम इस काम को करते हैं। जाहिर है कि इसके लिए बिजली अथवा ईंधन की जरूरत होती है। वहीं ईंधन को बचाकर उसके सही इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। देश-दुनिया में नई बहस छिड़ी है जो कि वाकई में एक गंभीर विषय है। ईंधन जो कि समाप्त होने वाले संसाधन से बने होते हैं, या तो वे समाप्त हो जाएंगे या फिर इनसे प्रदूषण का खतरा होता है। दोनों ही सूरत में इसे बच-बचाकर इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है। हम अगर गंभीरता से सोचकर दिमाग का इस्तेमाल करेंगे तो आसानी से ऊर्जा की बचत की जा सकती है।

यहीं हमें ऐसे पंप्स की जरूरत महसूस होती है जो कि कम ऊर्जा के खपत से काम कर सकते हैं। एनर्जी बचाकर आप ना केवल धरती को बचाते हैं बल्कि इससे आपकी जेब भी सुरक्षित होता है। कहने का मतलब है कि आपके खर्चे भी कम हो जाते हैं। ज़रा-सी सजगता से पंप्स का चुनाव करेंगे तो आप धरती को बचाने के साथ-साथ पैसे भी बचा सकते हैं।

ऊर्जा और पानी एक-दूसरे पर निर्भर करता है क्योंकि आमतौर पर जल की आपूर्ति पम्प और निकासी के माध्यम से ही होता है। सहारा हो या ग्रामीण क्षेत्रअधिकांश जल की आपूर्ति पम्प सेट के माध्यम से होता है जिसमें कि ऊर्जा की बहुत ज्यादा ही खपत होती है। पेयजल की बात हो या फिर सिंचाई के लिए जल की आपूर्ति पम्प की भूमिका सब जगह है और इसमें ऊर्जा की खपत भी जुड़ी होती है। इतना ही नहीं, बचे हुए खराब जल को निकालने के लिए भी पम्प और बिजली की भूमिका रहती है।

बहुत ही कम लोगों को पता होगा कि पम्प दुनिया के 10% बिजली की खपत करता है जिसमें कमोबेश ऊर्जा की बर्बादी भी होती है। इसे उपयोग करने वाले कुछ कारगर कदम उठाकर इसमें बदलाव कर सकते हैं। अगर सही पम्प का बेहतरीन प्रयोग करें तो हम कुल बिजली खपत का लगभग 4% बचा सकते हैं। इस बची बिजली से कई लाख लोगों के घर रौशन हो सकते हैं।

आज ऐसे पंप्स मौजूद हैं जिनका उपयोग कर बिजली की बचत करने के साथ-साथ पम्पिंग प्रक्रिया को कम खर्चीला, आसान और बेहतर बनाया जा सकता है। ऐसे ही उपकरण एनर्जी एफिशिएंट पंप्स के रूप में जाने जाते हैं।

 

यहां कुछ ऐसे तौरतरीकों की चर्चा करते हैं जिससे पंप्स को एनर्जी एफिशिएंट बनाया जा सकता है:

संचालन के तरीके 

आमतौर पर जल की आपूर्ति प्रवाह और प्रेशर के बीच काम करता है। लिहाजा अपनी जरूरत के हिसाब से पम्प का संचालन करके ऊर्जा की खपत को कम किया जा सकता है। इसके लिए आपको कई तरीके अपनाने पड़ सकते हैं जिसे आप टेस्ट करके देख सकते हैं कि कैसे आप इस्तेमाल करेंगे जिससे कि ऊर्जा की खपत भी कम हो और काम भी हो जाए! साथ ही आप बड़े पम्प ना लेकर छोटे पम्प की सहायता से अपना काम कर लें. इससे लम्बे समय में जाकर ऊर्जा की अच्छी बचत हो जाती है।

 

गति बदलकर 

पम्प किस गति से चल रहा है, इस पर निर्भर करता है कि बिजली की खपत कितनी हो रही है। आप अपने काम को देखते हुए इसकी गति को नियंत्रित कर ऊर्जा को बचा सकते हैं। बिजली को बचाने के लिए आमतौर पर आधी या धीमी गति से पम्प चलाकर काम करना बेहतर माना जाता है। पम्प को चलाते हुए आप जाँच-परख सकते हैं और उस हिसाब से उसके गति का प्रबंधन कर सकते हैं ताकि कम से कम ऊर्जा खर्च हो सके। इसके अलावे प्रवाह के मार्ग को सरल और बाधा रहित करके भी आप बिजली तो बचा ही लेते हैं, साथ ही आपका काम भी हो जाता है। खासकर सिंचाई के मामले में तो यह बहुत कारगर साबित होता है।

 

दक्ष मशीन 

ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के लिए पम्प आजकल विशेष रूप से डिज़ाइन किए जाते हैं। ऐसे मोटर्स और संबंधित उपकरणों का उपयोग करना बेहतर होता है। जैसे-जैसे तकनीक का विकास हुआ है, पम्प भी ऊर्जा की खपत को ध्यान में रखकर बनाए जाने लगे हैं। अगर हम सही पम्प का चुनाव करते हैं तो बिजली की खपत कम से कम होती है। आजकल पम्प बनाने वाली कम्पनी या सेलर्स भी आपको उपकरण के सम्बन्ध में विवरण देते हैं जिससे इसके चुनाव को लेकर आप स्पष्ट रह सकते हैं।

इस प्रकार हम देखते हैं कि एनर्जी एफिशिएंट पंप्स ऐसे उपकरण होते हैं जिनके इस्तेमाल से बिजली या ईंधन बहुत ही कम खर्च होते हैं। उपकरण के साथ-साथ जरूरी सावधानी रखकर भी इसके एनर्जी एफिशिएंसी को बढ़ाकर आप देश-दुनिया के साथ-साथ अपना भी भला कर सकते हैं। पम्प के मामले में ऐसी बात है कि ऊर्जा बचा तो भी भला और पानी बचा तो भी भला। दोनों की बचत होने से ये बेहद ही विन-विन की स्थिति रहती है।